जैस्पर क्रिस्टल पहन सकते हैं, मन को राहत देता है, शांत, शांत, साहस, आत्मविश्वास, ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। माना जाता है कि जैस्पर क्रिस्टल पहनने से कानूनी चुनौतियों के दौरान सहायता मिलती है। जैस्पर तनाव को दूर कर सकता है, शांत और केंद्रित मन को बढ़ावा दे सकता है, और साहस और आत्मविश्वास को बढ़ा सकता है। जबकि ये दावे वैज्ञानिक प्रमाणों के बजाय आध्यात्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं, वैकल्पिक प्रथाओं में आराम की तलाश करने वाले व्यक्ति ऐसे उपायों को शामिल करना चुन सकते हैं। भगवान हनुमान की पूजा करें: भक्त अक्सर प्रार्थना करते हैं, हनुमान…
Author: Astrologer Dr. Swati Saxena
भगवान गणेश (विघ्नहर्ता) की पूजा करें: विघ्नहर्ता (बाधाओं को दूर करने वाले) भगवान गणेश की पूजा करना एक लाभकारी प्रथा है। भक्तों का मानना है कि भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने से करियर में आने वाली बाधाएं दूर हो सकती हैं । अपने कार्यस्थल में गणेश की मूर्ति या चित्र रखें और सच्चे मन से प्रार्थना करें। माना जाता है कि नियमित रूप से गणेश मंत्र का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा आती है और पेशेवर सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। ज्योतिष के अनुसार, भगवान गणेश से जुड़े शुभ गुणों के साथ तालमेल बिठाने से करियर में उन्नति के…
मीन लग्न के लिये शनि साढे साती Saturn in Various Houses for Pisces Ascendant जन्म कुण्डली में ग्रह से मिलने वाले फल अनेक कारणों से प्रभावित होते है. जैसा कि सर्वविदित है कि ग्रह के फल दशाओं में प्राप्त होते है. चूंकि कई ग्रहों के पास दो-दो राशियों का स्वामित्व है. ऎसे में दशा अवधि में किस राशि के फल पहले प्राप्त होगें. यह जानने के लिये ग्रह की मूलत्रिकोण राशि का सर्वप्रथम अध्ययन किया जाता है. अब ये फल किस प्रकार के हो सकते है. इस कार्य में राशि के स्वामी ग्रह की स्थिति, युति, व दृष्टि सबसे महत्वपूर्ण…
सभी राशियों के लिये शनि साढेसाती उपाय (Remedies for Saturn Sadesati for All Rashis) शनि की साढेसाती व्यक्ति के मानसिक कष्टों में वृ्द्धि कर, व्यक्ति से सामान्य से अधिक मेहनत कराती है. इस अवधि में व्यक्ति को अपने कार्यो को पूर्ण करने के लिये बार-बार प्रयास करने पड सकते है. मेहनत के अनुरुप सफलता न मिलने के कारण कभी कभी व्यक्ति के स्वभाव में निराशा का भाव आने की भी संभावनाएं बनती है. शनि साढेसाती एक ओर जहां व्यक्ति को उसके कार्यक्षेत्र में कार्यो मे सफलता दिला, उन्नती व सफलतता के नये मार्ग खोलती है. वहीं इस अवधि में व्यक्ति…
संकट मोचन हनुमानाष्टक (Sankatmochan Hanuman Ashtak) ॥ सिया वर राम चंद्र की जय ॥ ॥ पवन सूत हनुमान की जय ॥ बाल समय रवि भक्षी लियो तब, तीनहुं लोक भयो अंधियारों। ताहि सों त्रास भयो जग को, यह संकट काहु सों जात न टारो। देवन आनि करी बिनती तब, छाड़ी दियो रवि कष्ट निवारो ॥ को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो ॥ बालि की त्रास कपीस बसैं गिरि, जात महाप्रभु पंथ निहारो। चौंकि महामुनि साप दियो तब, चाहिए कौन बिचार बिचारो। कैद्विज रूप लिवाय महाप्रभु, सो तुम दास के सोक निवारो ॥ को नहीं जानत है…
श्री बजरंग बाण, जिसे बजरंगबाण भी कहा जाता है, भगवान हनुमान को समर्पित एक शक्तिशाली और प्रसिद्ध प्रार्थना है। यह एक शक्तिशाली मंत्र है जो संकटों से मुक्ति दिलाता है और हनुमान जी की कृपा प्रदान करता है. बजरंगबाण का पाठ करने से भूत, प्रेत, और अन्य नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है, और यह व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से शक्तिशाली बनाता है स्थान: बजरंग बाण का पाठ किसी शांत और स्वच्छ स्थान पर करना चाहिए। समय: इसे सुबह या शाम के समय किया जा सकता है। ध्यान: पाठ करते समय हनुमान जी का ध्यान करना चाहिए। ।। सिया वर राम चंद्र…
ॐ नमश्चण्डिकायै (ॐ चंडिका देवी को नमस्कार है।) मार्कण्डेय जी कहते हैं : जयन्ती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा और स्वधा – इन नामों से प्रसिद्ध जगदम्बिके! तुम्हें मेरा नमस्कार है। देवी चामुण्डे! तुम्हारी जय हो। सम्पूर्ण प्राणियों की पीड़ा हरने वाली देवी! तुम्हारी जय हो। सब में व्याप्त रहने वाली देवी! तुम्हारी जय हो। कालरात्रि! तुम्हें नमस्कार है। मधु और कैटभ को मारने वाली तथा ब्रह्माजी को वरदान देने वाली देवी! तुम्हे नमस्कार है। तुम मुझे रूप (आत्मस्वरूप का ज्ञान) दो, जय (मोह पर विजय) दो, यश (मोह-विजय और ज्ञान-प्राप्तिरूप यश) दो और काम-क्रोध आदि शत्रुओं…
।। दुर्गा कवच ।। मार्कण्डेय जी ने कहा: पितामह! जो इस संसार में परम गोपनीय तथा सभी मनुष्यों की सब प्रकार से रक्षा करने वाला है और जो अब तक आपने दूसरे किसी के सामने प्रकट न किया हो, ऐसा कोई साधन मुझे बताइये| ब्रह्मा जी बोले: ब्रह्मन्! ऐसा साधन तो एक देवी का कवच ही है, जो गोपनीय से भी परम गोपनीय, पवित्र तथा सम्पूर्ण प्राणियों का उद्धार करने वाला है| महामुने! उसे श्रवण करो| देवी की नौ मूर्तियाँ हैं, जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं| उनके पृथक-पृथक (अलग-अलग) नाम बतलाये जाते हैं. प्रथम नाम शैलपुत्री है, दूसरी मूर्ति का नाम…
कीलक स्तोत्र का पाठ दुर्गा सप्तशती (देवी माहात्म्य) के अंतर्गत किया जाता है। इस स्तोत्र का पाठ अनिवार्य रूप से दुर्गा कवच और अर्गला स्तोत्र के बाद किया जाता है। इस स्तोत्र के पहले मंत्र का ३१ बार प्रतिदिन जप करने से मन में शान्ति प्राप्त होती है। यहाँ कीलक स्तोत्र का पूरा विवरण अर्थ सहित दिया गया है। ~ अथ कीलक स्तोत्रम् ~ विनियोगः- ॐ अस्य कीलकमंत्रस्य शिव ऋषिः अनुष्टुप् छन्दः श्रीमहासरस्वती देवता श्रीजगदम्बाप्रीत्यर्थं सप्तशतीपाठाङ्गत्वेन जपे विनियोगः।। ॐ नमश्चण्डिकायै- मार्कण्डेय उवाच- ॐ विशुद्धज्ञानदेहाय त्रिवेदीदिव्यचक्षुषे । श्रेयः प्राप्तिनिमित्ताय नमः सोमार्धधारिणे ।।१।। सर्वमेतद्विजानियान्मंत्राणामभिकीलकम् । सो-अपि क्षेममवाप्नोति सततं जाप्यतत्परः ।।२।।…
वैदिक ज्योतिष में, बृहस्पति (बृहस्पति) और राहु की युति, जिसे गुरु चांडाल योग के नाम से भी जानते हैं, ये योग सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के प्रभाव जीवन मे देते हैं राहु, एक छाया ग्रह है, जिस का प्रभाव जीवन मे आवेग को बढ़ाता हैं, ये वह ऊर्जा हैं जो संतुलन मे रहने की आदि नहीं होती, इसी लिये जब भी किसी भी ग्रह को अपने प्रभाव मे लेती हैं राहु की ऊर्जा तो जीवन मे असंतुलन बढ़ता हैं जो विपरीत परिस्थियो को बढ़ा देता हैं राहु इच्छाओं और अपरंपरागत सोच को बढ़ाता है, जबकि बृहस्पति ज्ञान और विस्तार…