वट सावित्री व्रत -26 मई 2025 वट वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और शिव का वास होता है, इसलिए इसकी उपासना करने से सुहागिन महिलाओं की सभी मनोकामनाएं पूरी व वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है। मान्यता है कि देवी सावित्री ने पति सत्यवान के प्राण यमराज से छीन लिए थे। तभी से महिलाएं ज्येष्ठ अमावस्या पर बरगद के पेड़ की उपासना करती हैं और पति के साथ व सहयोग की कामना करती हैं। इसे वट पूर्णिमा, बड़मावस और बरगदाही अमावस्या भी कहते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि पर मनाये जाने वाला वट सावित्री पर्व और व्रत 26…
Author: Astrologer Dr. Swati Saxena
बृहस्पति का गोचर ‘बृहस्पति का ट्रांजिट’ अतिचारी बृहस्पति देव मई में मिथुन में, अक्टूबर में कर्क में, और दिसंबर में पुनः मिथुन में प्रवेश करेंगे ——————————————- 2025 में बृहस्पति के ट्रांजिट की प्रमुख तिथियाँ 14 मई 2025 : बृहस्पति वृषभ राशि (Taurus) से निकलकर मिथुन राशि(Gemini) में प्रवेश करेंगे। 18 अक्टूबर 2025 : बृहस्पति मिथुन से कर्क राशि(Cancer) में प्रवेश करेंगे। 3 दिसंबर 2025 : बृहस्पति वक्री अवस्था में फिर से मिथुन राशि में लौट आएंगे। मिथुन राशि में गुरु का गोचर भाग्य, शिक्षा, करियर और संतान के लिए शुभ संकेत देता है। सिंह राशि के लिए धन लाभ और…
सूर्य को सरकार पक्ष का प्रतिनिधि माना गया है. यह एक ओज और तेज से परिपूर्ण रूप है. सूर्य की उन्नत स्थिति ही व्यक्ति के व्यवहार में तेजस्विता और ओज लाने में सहायक होती है. इसी प्रकार हथेली में सूर्य ग्रह की स्थिति का प्रभाव व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व को प्रभावित होता है. हथेली में सूर्य की स्थिति का उन्नत होना जिसमें सूर्य पर्वत और सूर्य की रेखा पर महत्वपूर्ण ध्यान दिया जाता है. सूर्य पर्वत हथेली पर सूर्य पर्वत की स्थिति अनामिका अँगुली के अंत में मूल में स्थित होती है. सूर्य पर्वत के की स्थिति अगर अच्छी हो…
विवाह के लिए शुभ समय और शुभ मुहूर्त को बहुत ध्यान के साथ करना चाहिए. विवाह मुहूर्त के लिए कई बातों का ध्यान रखने की आवश्यकता पड़ती है और बेहतर रुप से ज्योतिष गणना के द्वारा मुहूर्त शास्त्र एवं विवाह के लिए मुहूर्त निकालने की पद्धति को अपनाकर एक शुभ और योग्य समय का चयन किया जा सकता है. विवाह के लिए शुभ समय जानने के लिए जहां वर और कन्या की जन्म कुण्डली को देखा जाता है, वहीं उसके साथ शुभ दिन माह और योग इत्यादि भी देखने आवश्यक होते हैं. विवाह के मुहूर्त में मुख्य रुप से दस…
अक्षय तृतीया 2025: अक्षय तृतीया, जिसे आलोकित तृतीया भी कहा जाता है, हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो विशेष रूप से आभूषण, संपत्ति खरीदने, और नए कार्यों की शुरुआत के लिए शुभ माना जाता है। यह पर्व विष्णु पूजा और गणेश पूजा का दिन भी है। 2025 में, अक्षय तृतीया 30 अप्रैल को मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया का महत्व: अक्षय तृतीया का विशेष महत्व है क्योंकि इसे “अक्षय” (अर्थात कभी न घटने वाला) माना जाता है। इसे शुभ मुहूर्त के रूप में देखा जाता है, जो किसी भी अच्छे काम की शुरुआत के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता…
नवरात्रि में, देवी के अलग-अलग रूपों की पूजा करके, आप अलग-अलग ग्रहों को मजबूत कर सकते हैं, जैसे कि पहले दिन शैलपुत्री की पूजा से मंगल ग्रह मजबूत होता है. पहला दिन (शैलपुत्री): मंगल ग्रह मजबूत होता है. दूसरा दिन (ब्रह्मचारिणी): सूर्य ग्रह मजबूत होता है. तीसरा दिन (चंद्रघंटा): बुध ग्रह मजबूत होता है. चौथा दिन (कूष्माण्डा): शुक्र ग्रह मजबूत होता है. पाँचवा दिन (स्कंदमाता): गुरु ग्रह मजबूत होता है. छठा दिन (कात्यायनी): शनि ग्रह मजबूत होता है. सातवाँ दिन (कालरात्रि): राहु ग्रह मजबूत होता है. आठवाँ दिन (महागौरी): चंद्रमा ग्रह मजबूत होता है. नौवाँ दिन (सिद्धिदात्री): केतु ग्रह मजबूत…
नवरात्रि के दिनों में देवी के विभिन्न रूपों की पूजा का प्रभाव ग्रहों पर और भी गहरा होता है, और यह न केवल शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बल्कि व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में समृद्धि और शांति लाने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। 1. पहला दिन – शैलपुत्री (Maa Shailputri) ग्रह का प्रभाव: शनि और मंगल लाभ: शैलपुत्री की पूजा से शनि और मंगल ग्रह की शांति होती है, जो जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए कारगर साबित होती है। इसके साथ ही साहस, शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यह पूजा…
विक्रम संवत 2082 नववर्ष के आकाशीय मंडल में 2082 संवत के ग्रहो के मंत्री मंडल की बात करें तो संवत के राजा और मंत्री सूर्य होंगे सूर्य का दोनों पदों पर रहने की वजह से मंत्री और राजा के बीच किसी तरह का मतभेद नहीं रहेगा, जिस कारण कार्य बहुत एकाग्रता से पुरे करने पर जल्दी सफल रहेंगे पर प्रकृति रूप से देखे तो असंतुलन रहेगा, आपदाओं में तेजी रहेगी कम समय के लिए रहेगी पर बड़ा नुकसान दें सकती हैं एक सम मौसम रहने की बजाय मौसम में आंखमिचोली दिखेगी, पर तापमान में रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि रहेगी, भूकंप…
रात्रि में देवी पूजा से ग्रहों की स्थिति को बेहतर किया जा सकता है। ग्रहों का संतुलन बनाए रखने से मानसिक शांति, शारीरिक ऊर्जा, और भौतिक समृद्धि की प्राप्ति होती है। पहला दिन – शैलपुत्री ग्रह का प्रभाव: शनि और मंगल शैलपुत्री की पूजा से शनि और मंगल ग्रह की शांति होती है, जो जीवन में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए कारगर साबित होती है। इसके साथ ही साहस, शक्ति और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। यह पूजा विशेष रूप से कर्म, कार्य और शारीरिक शक्ति को बढ़ाने के लिए होती है। दूसरा दिन…
चैत्र नवरात्र 30 मार्च से 6 अप्रैल इस बार चैत्र नवरात्र का आरम्भ 30 मार्च से होगा,माँ गज पर सवार हो कर पृथ्वी पर मानव कल्याण व समृद्धि प्रदान करने के लिये पधारे गी गज पर माता का आना सुख समृद्धि और वैभव का शुभ संकेत हैं, इस नव संवतसर 2082 के लिये प्रतिपदा तिथि 29 मार्च को 04:28 शाम से आरम्भ हो कर 30 मार्च को 12:50 दुपहर तक रहेगी, उदिया तिथि के आधार पर 30 मार्च को रेवती नक्षत्र और इंद्र योग मे आरम्भ होगा नवरात्री महापर्व कलश स्थापना शुभ मुहूर्त 30 मार्च प्रतिपदा तिथि पर कलश स्थापना…