Author: Astrologer Dr. Swati Saxena

स्वाती सक्सेना को 70 वे राष्ट्रीय ज्योतिष महासम्मेलन गुवाहाटी में वैदिक विभूषण की उपाधि से श्री कलराज मिश्र द्वारा अलंकृत किया गया।ज्योतिष महाकुंभ में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से देहरादून में सम्मान प्राप्त किया,भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाती और उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह से कानपुर मे सम्मान प्राप्त किया। 2022 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी द्वारा ज्योतिष-आयुर्वेद महासमागम मे सम्मानित किया हस्तरेखा, वैदिक ज्योतिष व फेस रीडिंग के क्षेत्र मे 28वर्षों से कार्यरत, देश-दुनिया के हजारों लोगों के बारे में सटीक भविष्यवाणियां और उनका मार्गदर्शन किया। 2019 में की गई भविष्यवाणी कि भाजपा अकेले 303 सीटे प्राप्त कर सत्ता में वापस आएगी और नीचभंग राजयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विजयी बनायेगा, सर्वविदित और चर्चा में रही। वैदिक ज्योतिष के मतानुसार स्वाती सक्सेना का मानना है कि मनुष्य का जीवन कर्म और भाग्य दोनों से चलता है। आप का मुख्य फोकस इस बात पर रहता है कि भाग्य और कर्म के आधार पर भविष्यवाणी की जाए।

सूतजी बोले: वैश्य ने मंगलाचार कर अपनी यात्रा आरंभ की और अपने नगर की ओर चल दिए। उनके थोड़ी दूर जाने पर एक दण्डी वेशधारी श्रीसत्यनारायण ने उनसे पूछा: हे साधु तेरी नाव में क्या है? अभिवाणी वणिक हंसता हुआ बोला: हे दण्डी ! आप क्यों पूछते हो? क्या धन लेने की इच्छा है? मेरी नाव में तो बेल व पत्ते भरे हुए हैं। वैश्य के कठोर वचन सुन भगवान बोले: तुम्हारा वचन सत्य हो! दण्डी ऎसे वचन कह वहाँ से दूर चले गए। कुछ दूर जाकर समुद्र के किनारे बैठ गए। दण्डी के जाने के बाद साधु वैश्य ने…

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सूतजी बोले: हे श्रेष्ठ मुनियों, अब आगे की कथा कहता हूँ। पहले समय में उल्कामुख नाम का एक बुद्धिमान राजा था। वह सत्यवक्ता और जितेन्द्रिय था। प्रतिदिन देव स्थानों पर जाता और निर्धनों को धन देकर उनके कष्ट दूर करता था। उसकी पत्नी कमल के समान मुख वाली तथा सती साध्वी थी। भद्रशीला नदी के तट पर उन दोनो ने श्रीसत्यनारायण भगवान का व्रत किया। उसी समय साधु नाम का एक वैश्य आया। उसके पास व्यापार करने के लिए बहुत सा धन भी था। राजा को व्रत करते देखकर वह विनय के साथ पूछने लगा: हे राजन ! भक्तिभाव से…

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सूत जी बोले: हे ऋषियों ! जिसने पहले समय में इस व्रत को किया था उसका इतिहास कहता हूँ, ध्यान से सुनो! सुंदर काशीपुरी नगरी में एक अत्यंत निर्धन ब्राह्मण रहता था। भूख प्यास से परेशान वह धरती पर घूमता रहता था। ब्राह्मणों से प्रेम से प्रेम करने वाले भगवान ने एक दिन ब्राह्मण का वेश धारण कर उसके पास जाकर पूछा: हे विप्र! नित्य दुखी होकर तुम पृथ्वी पर क्यूँ घूमते हो? दीन ब्राह्मण बोला: मैं निर्धन ब्राह्मण हूँ। भिक्षा के लिए धरती पर घूमता हूँ। हे भगवान ! यदि आप इसका कोई उपाय जानते हो तो बताइए। वृद्ध…

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एक समय की बात है नैषिरण्य तीर्थ में शौनिकादि, अठ्ठासी हजार ऋषियों ने श्री सूतजी से पूछा हे प्रभु! इस कलियुग में वेद विद्या रहित मनुष्यों को प्रभु भक्ति किस प्रकार मिल सकती है? तथा उनका उद्धार कैसे होगा? हे मुनि श्रेष्ठ ! कोई ऎसा तप बताइए जिससे थोड़े समय में ही पुण्य मिलें और मनवांछित फल भी मिल जाए। इस प्रकार की कथा सुनने की हम इच्छा रखते हैं। सर्व शास्त्रों के ज्ञाता सूत जी बोले: हे वैष्णवों में पूज्य ! आप सभी ने प्राणियों के हित की बात पूछी है इसलिए मैं एक ऎसे श्रेष्ठ व्रत को आप…

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समस्त विघ्नों को हरते हैं गणेश जी, प्रत्येक बुधवार विशेष मंत्रो के साथ करे, गणेश जी की पूजा बुधवार को गणेश जी का वार माना गया है. बुधवार को इनकी आराधना करने से समस्त विघ्नों का नाश होता है, घर में सुख-समृद्धि का वास होता है, धन-धान्य की बरकत होती है और बुद्धि-विवेक का विकास होता है. सभी देवी-देवताओं से पूर्व इनकी आराधना की जाती है. किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत इन्हीं की पूजा-अर्चना से की जाती है. बुधवार क्यों है इनका वार एक पौराणिक मान्यता के अनुसार, कैलाश पर्वत पर जिस समय माता पार्वती के द्वारा गणेश जी…

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अब शनि देव नहीं करेगे परेशान, शुभ मुहुर्त में हनुमान जी की पूजा करने से संकटों से मुक्ति मंगलवार के दिन व्रत-पूजा करने से मिलते हैं कई लाभ शास्त्रों के अनुसार मंगलवार का व्रत रखने से कुंडली में मंगल ग्रह की निर्बलता दूर होती है और शुभ फल मिलने लगते हैं. वहीं शनि की महादशा और साढ़े साती को दूर करने के लिए भी यह बहुत लाभकारी होता है. इसके अलावा मंगलवार का व्रत सम्मान, बल, साहस और पुरुषार्थ को भी बढ़ाने वाला होता है. इस दिन विधि- विधान से शुभ मुहुर्त में हनुमान जी की पूजा करने से…

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जिस दिन शिव पूजन करना चाहते हैं, उस दिन सुबहसु स्नान आदि नित्य कर्मों से निवृत्तवृ होकर पवित्र हो जाएं। इसके बाद घर के मंदिर में ही या किसी शिव मंदिर जाएं। मंदिर पहुंचकर भगवान शिव के साथ माता पार्वती  और नंदी को गंगाजल या पवित्र जल अर्पितर्पि करें। जल अर्पितर्पि करने के बाद शिवलिंग पर चंदन, चावल, बिल्वपत्र, आंकआं ड़े के फूल और धतूरा तू चढ़ाएं। पूजन में इस मंत्र का जप करें ‘मन्दारमालांकलितालकायै कपालमालांकितशेखराय। दिव्याम्बरायै च दिगम्बराय नम: शिवायै च नम: शिवाय।।’ पूजा  संपन्न करने के लिए भगवान शिव को घी, शक्कर का भोग लगाएं और इसके बाद…

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वेद प्राचीनतम हिंदू ग्रंथ हैं। वेद शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के ‘विद्’ धातु से हुई है। विद् का अर्थ है जानना या ज्ञानार्जन, इसलिये वेद को “ज्ञान का ग्रंथ कहा जा सकता है। भारतीय मान्यता के अनुसार ज्ञान शाश्वत है अर्थात् सृष्टि की रचना के पूर्व भी ज्ञान था एवं सृष्टि के विनाश के पश्चात् भी ज्ञान ही शेष रह जायेगा। पुराण वाल्मीकि रामायण, पुराण और स्मृति ग्रंथ को धर्मग्रंथ नहीं माना जाता है। ये सभी इतिहास और व्यवस्था के ग्रंथ हैं। हिन्दू धर्म के एकमात्र धर्मग्रंथ है वेद।ये चार भागों में विभक्त है। ब्रह्म जी द्वारा जो ज्ञान ऋषियों…

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https://youtu.be/_acEQQawGLg वास्तु अनुसार विजिटिंग कार्ड विजिटिंग कार्ड के लिये वास्तुशास्त्र के नियम विजिटिंग कार्ड आप की पहचान है । आईना है आप के काम का और आप के काम करने के ढंग का,आपके व्यापार को , आपकी उन्नति को प्रभावित करता है ? जी हाँ , आइये जानते है की आपकी पहचान बताने वाले आपका विसिटिंग कार्ड किस तरफ से आपकी उन्नति को प्रभावित करता है …. वास्तु के अनुसार यदि विजिटिंग कार्ड बनाया जाये तो, सम्पर्क और व्यवासय दोनों में प्रगतिशीलता कायम रहेगी। विजिटिंग कार्ड और वास्तु की दिशाएं आप अपने विजिटंग कार्ड को अपने सामने रखें, ऊपर की…

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वास्तु शास्त्र में उत्तर-पश्चिम दिशा को वायव्य कोण के रूप में भी जाना जाता है। यह दिशा बेहद महत्वपूर्ण है। चंद्रमा वायव्य दिशा के स्वामी ग्रह है और वायु देव इस दिशा के अधिपति हैं। यह दिशा वायु के प्रवेश के लिए आदर्श स्थान है क्योंकि यह एक प्रकार से गर्म और ठंडे क्षेत्रों का मिलन बिंदु है उत्तर-पश्चिम (North west) दिशा हमें दीर्घायु, स्वास्थ्य एवं शक्ति प्रदान करती है इस दिशा में oxygen की प्रचुरता होती है । और इसी दिशा का प्रयोग कर के घर मे वायु को संतुलित कर सकते हैं । कोई भी साधारण कंपास से…

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