बसंत पंचमी पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है। शरद ऋतु के बाद बसंत ऋतु और फसल की शुरूआत होने के साथ ही बसंत पचंमी का त्यौहार मनाया जाता है। माघ महीने की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि से ऋतुराज बसंत का आगमन होता है।

माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि बसंत ऋतु के आगमन के उत्साह के साथ माँ सरस्वती के प्राकट्य दिवस होने की दिव्यता लिए है
बसंत पंचमी ज्ञान के प्रकाश को धरा पर प्रकाशित होने का पर्व है
23 जनवरी दिन शुक्रवार
पंचमी तिथि सुबह 02 :28 पर शुरू हो कर 24 जनवरी को सुबह 01:46 पर समाप्त होगी,
ऐसे में 23 जनवरी 2026 को बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाएगा।
वसंत पंचमी पर ज्ञान की देवी माँ सरस्वती को पीले आसन पर विराजमान कर पीले- सफेद पुष्प माँ को अर्पित कर “ऐं” बीज मंत्र का स्फटिक की माला या हल्दी की माला से जप करने से माँ सरस्वती की कृपा के साथ सकारात्मकता प्राप्त होती है
विद्यार्थी वर्ग विशेष इस पर्व पर
आम्रपत्र या स्वच्छ सफेद कागज़ पर पीले चंदन से ‘ऐं’ लिख कर माँ के चरणों मे अर्पित करे साथ ही नयी कलम का पूजन करे पूजन के बाद उस कलम का प्रयोग परीक्षा या विशेष समय पर करे और आम्रपत्र को अपने पास सुरक्षित रखें
ज्योतिषाचार्य
डॉ.स्वाति सक्सेना
