विश्व का सब से बड़ा धार्मिक आयोजन – 13 जनवरी पौष पूर्णिमा महाकुंभ  की शुरुवात

कुंभ – यानी समस्त शुभ ऊर्जाओं का व्याप्त होना और एक जगह एकत्र होन, इस समय ग्रहो के विशेष मंत्रिमंडल के आधीन अमृत प्राप्त भूमि पर अमृत पूर्ण जल मे स्नान कर जप और तप और विशेष अनुष्ठान आरम्भ होंगे

kumbh mela 2025

कुंभ भी चार प्रकार का होता है

1)कुम्भ  2) अर्ध कुम्भ  3) पूर्ण कुम्भ  4) महा कुम्भ
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कुंभ – प्रत्येक तीन वर्षों में प्रयाग, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन मे लगता है इस तरह 12 साल में चार बार कुंभ का आयोजन होता है

अर्थ कुंभ प्रत्येक 6 साल में एक बार होता है। इस का आयोजन प्रयागराज और हरिद्वार में ही होता हैं

पूर्ण कुंभ – प्रत्येक 12 साल बाद होता है। यह प्रयागराज, नासिक, हरिद्वार और उज्जैन में होता है। पूर्ण कुंभ का स्थान ग्रह स्थितियों के आधार पर निर्धारित होता है
12 साल के बाद, – ग्रह स्थिति के अनुसार ही पूर्ण कुंभ का स्थान निधारित होता है।

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हरिद्वार में कुंभ लगता है

जब बृहस्पति देव कुभ राशि में और सूर्य मेष राशि मे गोचर करते है।

प्रयागराज में कुंभ लगता है।

प्रयाग राज में कुम्भ लगता है जब सूर्य मकर राशि में और देव गुरु वृष राशि में होते हैं।

नासिक में कब कुम्भ लगता है

जब नासिक में कुम्भ लगता है। जब देवगुरु ब्रहस्पति सिंह राशि में गोचर कर रहे होगे

उज्जैन में कुम्भ लगता है

जब सिंह राशि में देव गुरु बृ० और सूर्य मेष राशि में हो

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स्वाती सक्सेना को 70 वे राष्ट्रीय ज्योतिष महासम्मेलन गुवाहाटी में वैदिक विभूषण की उपाधि से श्री कलराज मिश्र द्वारा अलंकृत किया गया।ज्योतिष महाकुंभ में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से देहरादून में सम्मान प्राप्त किया,भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाती और उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह से कानपुर मे सम्मान प्राप्त किया। 2022 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी द्वारा ज्योतिष-आयुर्वेद महासमागम मे सम्मानित किया हस्तरेखा, वैदिक ज्योतिष व फेस रीडिंग के क्षेत्र मे 28वर्षों से कार्यरत, देश-दुनिया के हजारों लोगों के बारे में सटीक भविष्यवाणियां और उनका मार्गदर्शन किया। 2019 में की गई भविष्यवाणी कि भाजपा अकेले 303 सीटे प्राप्त कर सत्ता में वापस आएगी और नीचभंग राजयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विजयी बनायेगा, सर्वविदित और चर्चा में रही। वैदिक ज्योतिष के मतानुसार स्वाती सक्सेना का मानना है कि मनुष्य का जीवन कर्म और भाग्य दोनों से चलता है। आप का मुख्य फोकस इस बात पर रहता है कि भाग्य और कर्म के आधार पर भविष्यवाणी की जाए।

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" जिंदगी के अक्स " Written by
Dr. Swati Saxena

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