Astro Scientist Swati Saxena -Best Astrologer in India.Surya https://shriastroswati.com Best Astrologer in India. Wed, 22 Jan 2025 16:22:40 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.1 https://i0.wp.com/shriastroswati.com/wp-content/uploads/2024/10/cropped-ganesha-site-icon-png-2.webp?fit=32%2C32&ssl=1 Astro Scientist Swati Saxena -Best Astrologer in India.Surya https://shriastroswati.com 32 32 218972732 सूर्य शनि की युति एक महत्वपूर्ण युति है, – प्रथम भाव मे सूर्य शनि की युति – इस युति के प्रभाव से व्यक्ति के के जीवन में आने वाली अधिकांश घटनाएं प्रभावित होती है https://shriastroswati.com/soory-shni-kee-yukti-ek-mhtvpooran-yukti-hai-is-yukti-ke-prbhaav-se-vykti-ke-ke-jeevn-men-aane-valee-adhikansh-ghtnaen-prbhaavit-hotee-hai/ Tue, 21 Jan 2025 16:44:14 +0000 https://shriastroswati.com/?p=13003 सूर्य शनि की  युति एक महत्वपूर्ण  युति है इस युक्ति के प्रभाव से व्यक्ति के के जीवन में आने वाली अधिकांश घटनाएं प्रभावित होती है क्योंकि दोनों ही ग्रह जीवन यापन के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण प्रभावी और उपयोगी है|surya shani yuti first bhav

आत्मा के कारक सूर्य जहां आपकी आत्मशक्ति स्वाभिमान निरोगी काया देते हैं वही कर्म प्रधान शनिदेव आपके कर्म, कार्य की प्रति आपकी समर्पण, कार्य क्षमताओं के के साथ जीवन के संघर्ष को दिखलाता है|
वही शनि और सूर्य की अच्छी स्थिति जीवन के हर लक्ष्य को पूर्ण करती है साथ में धर्म परायणता और लक्ष्य के प्रति समर्पण भी देती है,
सूर्य और शनि जितने कम अंशु पर एक दूसरे से विराजमान होते हैं उतनी ही  युति प्रबल होती है और और शनि की युक्ति का का प्रभाव अलग-अलग पड़ता है
समानता और और शनि की  युति से कुछ विशेष प्रभाव जीवन में देखने को मिलते हैं
सूर्य-शनि की युति के सामान्य प्रभाव
दुर्लभ संयोग माना जाता है.
इसके चलते जीवन में तनाव, क्रोध, सम्बन्धो मे उतार चढ़ाव खास कर पिता पुत्र के आपसी सम्बन्धो मे,
पारिवारिक तनाव, स्वास्थ्य समस्या
और आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ता है
सूर्य शनि की  युति शारीरिक विकारों
जन्म पत्रिका में सूर्य शनि की युक्ति शारीरिक विकारों को भी बढ़ती है
शारीरिक कमजोरी और दर्द, घुटने या पैर सम्बन्धी दिक्क़ते , दांत या त्वचा रोग, फ्रैक्चर, मांसपेशियों के रोग, लकवा, बहरापन, खांसी, दमा, अपच, तंत्रिका विकार

प्रथम भाव मे सूर्य शनि की युति

प्रथम भाव जिसे लग्न भी कहते हैं,जैन पत्रिका में लग्न भाव या प्रथम
भाव सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह भाव पूर्णतया आपके शरीर और आपकी मानसिकता को दर्शाता है अगर इस भाव में और और शनि की  युति विराजमान है और सूर्य और शनि शुभ प्रभावों में भी हैं तो विलक्षण सफलता प्राप्त होती है बस अत्यधिक हम भाव और कटुता का आचरण बढ़ जाता है ऐसे लोग भावुक नहीं होते और कठोर निर्णय लेने में देरी नहीं लगाते,
सूर्य शनि की युक्ति में अगर सूर्य कमजोर है तो जीवन में अधिक समस्या आ सकती है ऐसे में संघर्ष की अनुभूति स्वास्थ्य कमजोर और रिश्तो में भी तनाव बना रहता है
वहीं अगर शनि भी कमजोर हो तो निश्चित तौर पर आप यश की संभावनाएं कार्यक्षेत्र में तनाव आर्थिक पक्ष कमजोर और स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव रहता है
प्रथम भाव में सूर्य की युक्ति को लेकर ज्यादातर लोग एडमिनिस्ट्रेटिव पोजीशंस पर न्याय संगत कार्यों के साथ जुड़े हुए देखे गए हैं

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सूर्य आत्मा का कारक वहीं वही शनि कर्म के कारक है, – सूर्य और शनि की युति https://shriastroswati.com/soory-aatma-ka-kark-vheen-vhee-shni-krm-ke-kark-hai-soory-aur-shni-kee-yuti/ Sun, 19 Jan 2025 17:42:39 +0000 https://shriastroswati.com/?p=12986 Surya Shani Yuti

 

सूर्य आत्मा का कारक वहीं वही शनि कर्म के कारक है जहाँ आत्मा और कर्म आत्मसार होते हैँ वही सिद्धि भी प्राप्त होती हैँ|
सूर्य शनि आपस मे पिता पुत्र के बंधन मे बंधे है, इस सम्बन्ध की मधुरता यह है की आपस मे कितनी भी कटुता क्यों ना आ जाये, ये एक दूसरे का अनिष्ठ नहीं करेंगे

सूर्य और शनि की युति
जब किसी भी राशि या जन्म पत्रिका के किसी भी भाव मे शनि और सूर्य एक साथ विराजमान हो तो इसे सूर्य शनि की युक्ति कहा जाता है
दोनों ही ग्रह गंभीर प्रभाव देनेवाले है और इन का प्रभाव भी मनुष्य की जीवन मे बहुत अधिक व्यापाक होता है.

व्यक्ति के स्वभाव पर प्रभाव
सूर्य और शनि की युति से व्यक्ति में कठोरता और कभी कभी अत्याधिक चढ़चडापन आ जाता है. अनुशाषित और जिम्मेदारी की भावना से कार्य करते है, जीवन के प्रति गंभीर दृष्टिकोण रखते है.

व्यक्ति के स्वास्थ्य पर प्रभाव
स्वास्थ्य के आधार पर विशेष रूप से मानसिक तनाव, जो पारवारिक रिश्तो मे उतार चढाव और कार्यक्षेत्र मे अत्याधिक महनत करने के संघर्ष को लेकर रहता है नींद से जुड़ी परेशानी भी बढ़ती है इस युक्ति के कारण,वहीं हड्डी और वायु विकार भी बढ़ते है.

व्यक्ति के धन पर
सूर्य और शनि की युक्ति वाले लोगो को धन संचय करने मे कोई परेशानी नहीं होती, अगर शुभ ग्रहो की स्थिति मजबूत है जन्म पत्रिका मे तो अपार धन संग्रह कर जीवन मे मजबूत आर्थिक स्थिति पाते है.
वहीं इस युक्ति के होते हुए, कुछ अशुभ ग्रहो का प्रभाव अगर अधिक होता है तो इस के विपरीत आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए बहुत अधिक संघर्ष करना पड़ता है बहुत प्रयासो की बाद जीविका मिल पाती है.

व्यक्ति के रिश्तो पर प्रभाव
सूर्य शनि की युक्ति के प्रभाव से व्यक्ति को लेकर बहुत सजग रहता, बहुत मुश्किल से मिलते जुलते है, भावुकता की कमी के कारण लोगो से जल्दी कनेक्ट नहीं हो पाते हैं
वहीं बड़ो के प्रति सेवा भाव अधिक होती है पर विचार मे भिन्नता के कारण सम्बन्धो मे तनाव रहता है.
इसी लिए इस युक्ति के कारण पिता पुत्र मे विरोध की संभवनाये भी बढ़ जाती है.

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