शनि अमावस्या

भाद्रपद माह की अमावस्या तिथि की शुरुआत- 22 अगस्त को दिन में 11 बजकर 55 मिनट पर
अमावस्या तिथि का समापन- 23 अगस्त को दिन में 11 बजकर 35 मिनट पर
पीपल के पेड़ में पितरों का वास माना जाता है।
इसे शनिचरी अमावस्या भी कहते हैं.
हिंदू धर्म में अमावस्या की तिथि को बहुत विशेष माना जाता है. साल 2025 में अगस्त माह की अमावस्या को भाद्रपद माह की अमावस्या के नाम से जाना जाता है. अमावस्या तिथि पितरों का तर्पण करने और श्राद्ध के लिए सबसे उत्तम तिथि मानी जाती है. इस दिन स्नान, दान का विशेष महत्व होता है. अमावस्या तिथि के दिन पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए इस दिन पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए.
