पूर्णिमा श्राद्ध या पहला श्राद्ध
इस बार ग्रहण होने के कारण पूर्णिमा का श्राद्ध 12 से पहले कर लेना होगा 7 सितबर को क्योंकि 7 दुपहर 12:30 से चंद्र ग्रहण जो भारत मे दृश्य है का सूतक लग जायेगा

प्रतिपदा का श्राद्ध 08 सितंबर
दूसरी तिथि का श्राद्ध द्वितीया का श्राद्ध 09 सितंबर
तीसरी तिथि का श्राद्ध तृतीया तिथि 10 सितंबर
चौथी तिथि यानि चतुर्थी का श्राद्ध भी 10 सितंबर 2025
पांचवी तिथि यानि पंचमी का श्राद्ध 11 सितंबर 2025 को है।
षष्ठी तिथि का श्राद्ध से है तो आपको 12 सितंबर 2025
सप्तमी तिथि का श्राद्ध 13 सितंबर 2025
अष्टमी तिथि का श्राद्ध 14 सितंबर 2025
नवमी तिथि का श्राद्ध 15 सितंबर 2025
दशमी तिथि का श्राद्ध 16 सितंबर 2025
ग्यारहवीं तिथि यानि एकादशी तिथि का श्राद्ध 17 सितंबर 2025
द्वादशी तिथि का श्राद्ध इस साल 18 सितंबर
त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध 19 सितंबर 2025
चतुर्दशी श्राद्ध 20 सितंबर 2025
सर्व पितृ अमावस्या तिथि का खास महत्व है। क्योंकि अगर आपको अपने पूर्वजों के मृत्यु की तिथि नहीं मालूम हो तो आप सर्व पितृ अमावस्या तिथि पर श्राद्ध और तर्पण कर सकते है,इस साल सर्प पितृ अमावस्या 21 सितंबर 2025 को है।
घर पर ही श्राद्ध करने की आसान विधि
- घर पर ही उपाय और श्राद्ध करने के लिए श्राद्ध वाली तिथि पर सूर्योदय से पहले उठकर नहाएं।
- साफ कपड़े पहनकर पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध और दान का संकल्प लें। श्राद्ध होने तक कुछ न खाएं।
- दिन के आठवें मुहूर्त यानी कुतुप काल में श्राद्ध करें। जो कि 11.36 से 12.24 तक होता है।
- दक्षिण दिशा में मुंह रखकर बाएं पैर को मोड़कर, घुटने को जमीन पर टिका कर बैठ जाएं।
- तांबे के चौड़े बर्तन में जौ, तिल,
- चावल, गाय का कच्चा दूध, गंगाजल, सफेद फूल और पानी डालें।
- हाथ में कुशा घास रखें और उस जल को हाथों में भरकर सीधे हाथ के अंगूठे से उसी बर्तन में गिराएं। इस तरह 11 बार करते हुए पितरों का ध्यान करें।
- पितरों के लिए अग्नि में खीर अर्पण करें। इसके बाद पंचबलि यानी देवता, गाय, कुत्ते, कौए और चींटी के लिए अलग से भोजन निकाल लें।
- ब्राह्मण भोजन करवाएं और श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा और अन्य चीजों का दान करें।
