नव संवत्सर -2083 ‘रौद्र’ संवत्सर दिन गुरूवार चैत्र नवरात्र प्रतिपदा तिथि से शुरू होगा

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नव संवत्सर -2083 ‘रौद्र’ संवत्सर दिन गुरूवार चैत्र नवरात्र प्रतिपदा तिथि से शुरू होगा

विक्रमसम्वसर का आरम्भ राजा विक्रमादित्य ने किया और उन्होंने ये तिथि इस लिये चुनी हिन्दू नववर्ष की शुरुवात के लिये क्योंकि हमारे सनातन धर्म मे शास्त्रों मे वर्णित है की चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा पर ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी

Hindu Nav Varsh 2026
इस कारण ही सम्राट विक्रमादित्य ने इस तिथि की शुभता और महत्व को समझते हुए इसी तिथि से नव संवतसर का आरम्भ किया
ज्योतिष के पुराने ग्रंथो मे संस्कृत भाषा मे संवत्सर के नाम व उस का प्रभाव भी वर्णित है

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ज्योतिषी आंकलन के आधार पर
नव संवत्सर 19 मार्च गुरुवार के दिन नवरात्रि की प्रथम तिथि प्रतिपदा से आरंभ होगा इस संवत्सर के राजा देवगुरु बृहस्पति है और मिथुन राशि में मार्गी रहेंगे साल की शुरुवात मे मार्गी बृहस्पति का मिथुन राशि मे होना आर्थिक उन्नति और व्यापारिक विस्तार को बताता है,
बृहस्पति 11मार्च के बाद 2 जून को अपनी उच्च राशि कर्क मे गोचर आरम्भ करेंगे

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स्वाती सक्सेना को 70 वे राष्ट्रीय ज्योतिष महासम्मेलन गुवाहाटी में वैदिक विभूषण की उपाधि से श्री कलराज मिश्र द्वारा अलंकृत किया गया।ज्योतिष महाकुंभ में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से देहरादून में सम्मान प्राप्त किया,भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाती और उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह से कानपुर मे सम्मान प्राप्त किया। 2022 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी द्वारा ज्योतिष-आयुर्वेद महासमागम मे सम्मानित किया हस्तरेखा, वैदिक ज्योतिष व फेस रीडिंग के क्षेत्र मे 28वर्षों से कार्यरत, देश-दुनिया के हजारों लोगों के बारे में सटीक भविष्यवाणियां और उनका मार्गदर्शन किया। 2019 में की गई भविष्यवाणी कि भाजपा अकेले 303 सीटे प्राप्त कर सत्ता में वापस आएगी और नीचभंग राजयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विजयी बनायेगा, सर्वविदित और चर्चा में रही। वैदिक ज्योतिष के मतानुसार स्वाती सक्सेना का मानना है कि मनुष्य का जीवन कर्म और भाग्य दोनों से चलता है। आप का मुख्य फोकस इस बात पर रहता है कि भाग्य और कर्म के आधार पर भविष्यवाणी की जाए।

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" जिंदगी के अक्स " Written by
Dr. Swati Saxena

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