नव संवत्सर -2083 ‘रौद्र’ संवत्सर दिन गुरूवार चैत्र नवरात्र प्रतिपदा तिथि से शुरू होगा
विक्रमसम्वसर का आरम्भ राजा विक्रमादित्य ने किया और उन्होंने ये तिथि इस लिये चुनी हिन्दू नववर्ष की शुरुवात के लिये क्योंकि हमारे सनातन धर्म मे शास्त्रों मे वर्णित है की चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा पर ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी

इस कारण ही सम्राट विक्रमादित्य ने इस तिथि की शुभता और महत्व को समझते हुए इसी तिथि से नव संवतसर का आरम्भ किया
ज्योतिष के पुराने ग्रंथो मे संस्कृत भाषा मे संवत्सर के नाम व उस का प्रभाव भी वर्णित है

ज्योतिषी आंकलन के आधार पर
नव संवत्सर 19 मार्च गुरुवार के दिन नवरात्रि की प्रथम तिथि प्रतिपदा से आरंभ होगा इस संवत्सर के राजा देवगुरु बृहस्पति है और मिथुन राशि में मार्गी रहेंगे साल की शुरुवात मे मार्गी बृहस्पति का मिथुन राशि मे होना आर्थिक उन्नति और व्यापारिक विस्तार को बताता है,
बृहस्पति 11मार्च के बाद 2 जून को अपनी उच्च राशि कर्क मे गोचर आरम्भ करेंगे
