hanumaan ji jay

श्री बजरंग बाण, जिसे बजरंगबाण भी कहा जाता है, भगवान हनुमान को समर्पित एक शक्तिशाली और प्रसिद्ध प्रार्थना है। यह एक शक्तिशाली मंत्र है जो संकटों से मुक्ति दिलाता है और हनुमान जी की कृपा प्रदान करता है. बजरंगबाण का पाठ करने से भूत, प्रेत, और अन्य नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है, और यह व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से शक्तिशाली बनाता है

स्थान:
बजरंग बाण का पाठ किसी शांत और स्वच्छ स्थान पर करना चाहिए।
समय:
इसे सुबह या शाम के समय किया जा सकता है।
ध्यान:
पाठ करते समय हनुमान जी का ध्यान करना चाहिए।

।। सिया वर राम चंद्र की जय ।।   ।। पवनसुत हनुमान की जय ।।

।। दोहा ।।

निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करैं सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।।

।। चौपाई ।।

जय हनुमंत संत हितकार, सुन लीजै प्रभु अरज हमारी ।
जन के काज बिलंब न कीजै, आतुर दौरि महा सुख दीजै ।।

जैसे कूदि सिंधु महिपारा, सुरसा बदन पैठि बिस्तारा ।
आगे जाय लंकिनी रोका, मारेहु लात गई सुरलोका ।।
जाय बिभीषन को सुख दीन्हा, सीता निरखि परमपद लीन्हा ।
बाग उजारि सिंधु महँ बोरा, अति आतुर जमकातर तोरा ।।

अक्षय कुमार मारि संहारा, लूम लपेटि लंक को जारा ।
लाह समान लंक जरि गई, जय-जय धुनि सुरपुर नभ भई ।।
अब बिलंब केहि कारन स्वामी, कृपा करहु उर अंतरयामी ।
जय-जय लखन प्रान के दाता, आतुर ह्वै दुख करहु निपाता ।।

जय हनुमान जयति बल-सागर, सुर-समूह-समरथ भट-नागर ।
ॐ हनु-हनु-हनु हनुमंत हठीले, बैरिहि मारु बज्र की कीले ।।
ॐ ह्नीं ह्नीं ह्नीं हनुमंत कपीसा, ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर सीसा ।
जय अंजनि कुमार बलवंता, शंकर सुवन बीर हनुमंता ।।

बदन कराल काल-कुल-घालक, राम सहाय सदा प्रतिपालक ।
भूत, प्रेत, पिसाच निसाच, अगिन बेताल काल मारी मर ।।
इन्हें मारु, तोहि सपथ राम की, राखु नाथ मरजाद नाम की ।
सत्य होहु हरि सपथ पाइ कै, राम दूत धरु मारु धाइ कै ।।

जय-जय-जय हनुमंत अगाधा, दुख पावत जन केहि अपराधा ।
पूजा जप तप नेम अचारा, नहिं जानत कछु दास तुम्हारा ।।
बन उपबन मग गिरि गृह माहीं, तुम्हरे बल हौं डरपत नाहीं ।
जनकसुता हरि दास कहावौ, ताकी सपथ बिलंब न लावौ ।।

जै जै जै धुनि होत अकासा, सुमिरत होय दुसह दुख नासा ।
चरन पकरि कर जोरि मनावौं, यहि औसर अब केहि गोहरावौं ।।
उठु उठु चलु तोहि राम दुहाई, पायँ परौं कर जोरि मनाई ।
ॐ चं चं चं चं चपल चलंता, ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमंता ।।

ॐ हं हं हाँक देत कपि चंचल, ॐ सं सं सहमि पराने खल-दल ।
अपने जन को तुरत उबारौ, सुमिरत होय आनंद हमारौ ।।
यह बजरंग-बाण जेहि मारै, ताहि कहौ फिरि कवन उबारै ।
पाठ करै बजरंग-बाण की, हनुमत रक्षा करै प्राण की ।।

यह बजरंग बाण जो जापैं, तासों भूत-प्रेत सब कापैं ।
धूप देय जो जपै हमेसा, ताके तन नहिं रहै कलेसा ।।
ताके तन नहिं रहै कलेसा……

।। दोहा ।।

प्रेम प्रतीतिहि कपि भजे , सदा धरै उर ध्यान ।
तेहि के कारज तुरत ही, सिद्ध करैं हनुमान ।।

Share.

स्वाती सक्सेना को 70 वे राष्ट्रीय ज्योतिष महासम्मेलन गुवाहाटी में वैदिक विभूषण की उपाधि से श्री कलराज मिश्र द्वारा अलंकृत किया गया।ज्योतिष महाकुंभ में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत से देहरादून में सम्मान प्राप्त किया,भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के नाती और उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह से कानपुर मे सम्मान प्राप्त किया। 2022 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी द्वारा ज्योतिष-आयुर्वेद महासमागम मे सम्मानित किया हस्तरेखा, वैदिक ज्योतिष व फेस रीडिंग के क्षेत्र मे 28वर्षों से कार्यरत, देश-दुनिया के हजारों लोगों के बारे में सटीक भविष्यवाणियां और उनका मार्गदर्शन किया। 2019 में की गई भविष्यवाणी कि भाजपा अकेले 303 सीटे प्राप्त कर सत्ता में वापस आएगी और नीचभंग राजयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विजयी बनायेगा, सर्वविदित और चर्चा में रही। वैदिक ज्योतिष के मतानुसार स्वाती सक्सेना का मानना है कि मनुष्य का जीवन कर्म और भाग्य दोनों से चलता है। आप का मुख्य फोकस इस बात पर रहता है कि भाग्य और कर्म के आधार पर भविष्यवाणी की जाए।

Comments are closed.

" जिंदगी के अक्स " Written by
Dr. Swati Saxena

X