फाल्गुन पूर्णिमा -होलिका दहन 2 मार्च
2 मार्च को निशाव्यापिनी पूर्णिमा प्राप्त हो रही है. हालांकि, 2 मार्च को शाम 5 :18 मिनट से भद्रा लग रही है, इसलिए भद्रा के मुख काल को त्यागकर, भद्रा पूंछ काल में 2 मार्च की रात 12 : 50 से रात 2 :02 तक होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत है.
बाधा निवारण: घी और गोबर के उपले चढ़ाने से और होलिका की अग्नि घर लाने व उसकी राख माथे पर लगाने से नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष दूर होता है।
ग्रह शांति: पूजन में काले तिल अर्पित करने से उग्र ग्रहों का प्रभाव शांत होता है।
समृद्धि और आरोग्य: घी, गोबर के उपले और गेहूं की बालियां अग्नि में अर्पित करने से सुख-समृद्धि और बेहतर स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
3 मार्च ग्रहण-सुबह 9:39 से सूतक काल आरम्भ, जो ग्रहण समाप्त होने के साथ समाप्त होगा।
साल का पहला चन्द्रग्रहण
3 मार्च, मंगलवार को – 2:16 से शुरू होकर शाम 5 : 33 मिनट तक रहेगा।
ये ग्रहण भारत मे दृश्य है इस लिये सूतक काल भी मान्य होंगा,

4 मार्च रंगों की होली
ज्योतिषाचार्या स्वाति सक्सेना
संस्थापक अंतरंग
